सुरेश मोकलपुरी
"सुरेश मोकलपुरी" की हास्य व्यंग कवितायें
Friday, November 23, 2012
Tuesday, December 20, 2011
Adam Gondvi ko Shraddhanjali
उसे बेवा की माथे की शिकन तक ले चलो ............
ग़ज़ल की नई परिभाषा देने वाले अदम गोंडवी साहब आज हमारे बीच नहीं है , लेकिन उनकी कलम से निकले हुए अल्फाज आज और आने वाले दिनों में भी हमें एक नई राह दिखाते रहेंगे.....
२५ सालो की मित्रता और साहित्यिक मार्गदर्शन , परिवार के हर शख्स से उनका लगाव उनकी कमी महसूस करता रहेगा.......
"सुरेश मोकलपुरी
Monday, December 19, 2011
तो दरोगा साहब गुर्राकर बोले की हमारी सरकार भयमुक्त समाज का वादा निभा रहीहै
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इस चुनाव के दौरान
इस चुनाव के दौरान कई सज्जन मेरे पास आये,
मेरा चरण छूकर मुस्कुराये, मैंने सोचा शायद मेरी इज्जत इस दौरान कुछ बढ़ी है ,
उन्होंने कहा भाई साहब मेरा चुनाव निशाँ सीढ़ी है ,
हमें वोट दीजिये जिताइये,
मैंने कहा मुल्क की बची कुची इजजत Aap bhi मिटटी में मिलाईये,
तब तक एक दुसरे सज्जन मेरे पास आये
उन्होंने कहा भाई साहब मेरा चुनाव निशान साईकिल है
मैंने कहा आप क लिए क्या मुश्किल है ,
बाटिये अलगाव का परचम , इसी साईकिल पर बैठकर
उडिय मानवता का मजाक इसी साईकिल पर बैठकर
उन्होंने कहा साला भाभन है , मैंने कहा कोई बात नहीं दोस्त ,
हम कवी है हमारे पास हर fun है ....
तब तक एक तीसरे सज्जन है , उन्होंने कहा भाई साहब
मेरा चुनाव निशाँ कमल है
साथ साथ बजरंग दल है , हम मंदिर वही बनायेंगे
मैंने कहा भाईसाहब हम तो मुसलमान है , हम नमाज पढने कहा जायेंगे
तब तक एक चौथे सज्जन आये, मेरा चरण छूकर मुस्कुराये
उन्होंने कहा भाई साहब मेरा चुनाव निशाँ पंजा है ,
मैंने कहा तमाचे मारो , मनमोहन का सर गंजा है
जितना गोष्त निकाल सकते हो निकले, हम तो गरीब आदमी है साहब
हम पर बुरी नजर मत डालो....................
तब तक एक पांचवे सज्जन आये
उन्होंने कहा जय भीम , मैंने कहा समझ गया आपकी थीम
आपका चुनाव निशाँ जरूर हाथी Hoga
उन्होंने कहा भाईसाहब आप तो काफी समझदार है
मैंने कहा हम तो आपके सगे पत्तीदार है
हाथी हमारा जीवन साथी है ,
Akal se khota , Shareer Se bhaari hai ,
Jaise Rahul gandhi ko jhelna mayavati ki lchaari hai ........
इक्कीसवी सदी आई है ........
देखना ये है की क्या इनके लिए भी इक्कीसवी सदी आई है ........
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संविधान सिगरेटे है , लोकतंत्र दियासलाई
सत्ता काश और संसद स्ट्रे
नेता पीते है , गुल झाड़ते
स्ट्रे भरता है , और फ़ेंक दिया जाता है
जनता के बीच जो तम्बाकू की फसल उगाता है ...
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लाल किले की प्राचीर से जब मैंने अपनी दृष्टि नीचे दौड़ाई
तो जम्हूरियत की शक्ल एक मरियल गाय सी नजर आयी
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Sunday, November 2, 2008
कल रात सपने में,
मुझे नेता जी सुभाष चन्द्र बोश मिले ,
उनका चरण राज लेकर हम खिले ,
मैंने पूछा नेता जी आप इतने दिनों तक कहा रूपोश थे ,
क्रांतिकारी होते हुए भी आप खामोश थे ,
देखते नहीं दिनों दिन मुल्क की बिगड़ रही सूरत है ,
आज देश को आपकी शख्त जरूरत है ,
आप जल्दी से बहार आ जाईये ,
एक नई पार्टी बनाइये और चुनाव लड़ जाइयेनेता जी बोले सुरेश ,
भाई गर मै इस मुल्क में बाहर चला आता तो,
गाँधी की तरह सीने में गोली और समाधी पर गाली खाता ,
या फिर लोहिया कृपलानी की तरह चुनाव हार जाता ,
और जो लोग मुझे गाली देते या मेरी समाधी को जूतों रौंदते ,
वे या तो किसी सूबे के मुख्यमंत्री होते ,
या फिर प्रधानमंत्री बनने का सपना संजो रहे होते,
बच्चा इसीलिए मै खामोश था ,
क्रांतिकारी हुए भी आज तक रूपोश था
Chadikaaye
Phir bhi hamari Talasi Kyu Li Ja Rahi Hai,
To Daroga Sahab Gurrakar Bole,
Hamari Sarkaar Bhaymukt Sarkaar Ka Vaada Nibha Rahi hai,...........
Pait Me Ann Ho , Jeb TanaTann Ho,
To Chunav ladiye ladaiye
Peeche Khade Khade Mooh Mat Banaiye
Aage Badhkar Apni Sarkaar Banaiye.....