Sunday, January 3, 2016



वर्ष भर पूरे
घड़ी का पेन्डुलम हिलता रहा
तारीखें बदलतीं रहीं
समय टिक टिक टिक करता हुआ
चलता रहा
सब कुछ गतिमान था
किन्तु मै परेशान था
क्याेंकि हमें
हमारे आसपास कुछ भी नया
नही दिखाई दे रहा था
मात्र इतने के
दीवालाें की ईटाें मे लगी लाेनी
लाेहे के ज़गलों मे लगे जंग
भुरभुरा कर नीचे गिरने लगे थे
किताबों में फफू़द
सड़कों पर खून कें काले धब्बो के निशान
भीड़ में तबदील जनता
भेड़िए में तबदील शासक
कलेन्डर में तबदील नववर्ष

ग्रीटिंग  कार्ड में तबदील रिस्ते
सबकुछ अतीत जैसा था
घड़ी की पेन्डुलम की तरह
हम सिर्फ हिलते रहे


सुरेश मोकलपुरी

Wednesday, December 30, 2015

 "नव वर्ष २०१६ "

पूरा वर्ष तुम्हारे नाम
समय शिला  तो तुम्हे प्रणाम
सम्बन्धी की सुमधुर थाती,
तन का दीपक मन की बाती
नित नव जल करे अविराम ,
पूरा वर्ष तुम्हारे नाम
समय शिला तो तुम्हे प्रणाम

वर्ष नया नव स्वप्न सजोये
अवरोधों को गंगा धोये ,
गीता , वेद कुरान की साख
बची रहे न होए राख

हम अर्जुन , तुम बनो तो श्याम
मै भी जीता रहू अनाम
पूरा वर्ष तुम्हारे नाम, समय शिला हो तुम्हे प्रणाम
समय शिला हो तुम्हे प्रणाम

नव वर्ष २०१६ की हार्दिक बधाई ........

"सुरेश मोकलपुरी "

         " साहित्य "

हादसों में गुम होता हुआ शहर
लालटेन की बुझती रौशनी में
छुपा गाँव
मवाद भरे फोड़े को सहलाते लोग
धरती से मिला आकाश ,
आकाश से मिली धरती तो .......
कब का लिखा जा चूका है
अब खून से सनी धरती ,
लपटों पर टिका आकाश ,
लिखा जाना है
घुप्प अँधेरा
बिना रौशनी क लिखते लोग
इससे ज्यादा क्या लिखेंगे ...........


"सुरेश मोकलपुरी "

Friday, November 23, 2012

 दादा बाल ठाकरे ,

आज आप नहीं रहे , पूरा मुल्क आपके लिए रो रहा है , काश हम भी न रहते और अगर है तो ये सोचने की जरूरत है की दुनिया बाल ठाकरे की विचारधाराओ से प्रभावित होगी , दुखी होगी या फिर उसे कैश करने की कोशिश में लग जायेगी , राज ठाकरे ने उनकी समाधी बनने को लेकर राजनीति शुरू कर ही दी है , बाल ठाकरे 26/11 को याद करो , हेमंत करकरे 26/11 को याद करो , 

दुनिया  के हिन्दुओ , आज की तारिख को याद करो , की एक बुड्ढा शेर था जो इस दुनिया को अलविदा कह गया , कार्टून से लेकर सामना तक जो चाहा वो कर गया , अब ये तुम्हारे ऊपर निर्भर करता है की तुम उस मराठी मानुष के लिए कुछ कर पाओगे या फिर वो जो दुनिया चाहती है वो या जो वो खुद चाहता  था वो .......

इस प्रश्न की उत्तर की प्रतीक्षा में आपका   

सुरेश मोकलपुरी 

Tuesday, December 20, 2011

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Adam Gondvi ko Shraddhanjali

जो ग़ज़ल माशूक के जलवों से वाकिफ हो गई
उसे बेवा की माथे की शिकन तक ले चलो ............
ग़ज़ल की नई परिभाषा देने वाले अदम गोंडवी साहब आज हमारे बीच नहीं है , लेकिन उनकी कलम से निकले हुए अल्फाज आज और आने वाले दिनों में भी हमें एक नई राह दिखाते रहेंगे.....
२५ सालो की मित्रता और साहित्यिक मार्गदर्शन , परिवार के हर शख्स से उनका लगाव उनकी कमी महसूस करता रहेगा.......

"सुरेश मोकलपुरी

Monday, December 19, 2011

मैंने पुछा आखिर हम चोर तो नहीं हमारी तलाशी क्यों ले जा रही है ,
तो दरोगा साहब गुर्राकर बोले की हमारी सरकार भयमुक्त समाज का वादा निभा रहीहै
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इस चुनाव के दौरान

इस चुनाव के दौरान कई सज्जन मेरे पास आये,


मेरा चरण छूकर मुस्कुराये, मैंने सोचा शायद मेरी इज्जत इस दौरान कुछ बढ़ी है ,


उन्होंने कहा भाई साहब मेरा चुनाव निशाँ सीढ़ी है ,


हमें वोट दीजिये जिताइये,


मैंने कहा मुल्क की बची कुची इजजत Aap bhi मिटटी में मिलाईये,


तब तक एक दुसरे सज्जन मेरे पास आये


उन्होंने कहा भाई साहब मेरा चुनाव निशान साईकिल है


मैंने कहा आप क लिए क्या मुश्किल है ,


बाटिये अलगाव का परचम , इसी साईकिल पर बैठकर


उडिय मानवता का मजाक इसी साईकिल पर बैठकर


उन्होंने कहा साला भाभन है , मैंने कहा कोई बात नहीं दोस्त ,


हम कवी है हमारे पास हर fun है ....


तब तक एक तीसरे सज्जन है , उन्होंने कहा भाई साहब


मेरा चुनाव निशाँ कमल है


साथ साथ बजरंग दल है , हम मंदिर वही बनायेंगे


मैंने कहा भाईसाहब हम तो मुसलमान है , हम नमाज पढने कहा जायेंगे


तब तक एक चौथे सज्जन आये, मेरा चरण छूकर मुस्कुराये


उन्होंने कहा भाई साहब मेरा चुनाव निशाँ पंजा है ,


मैंने कहा तमाचे मारो , मनमोहन का सर गंजा है


जितना गोष्त निकाल सकते हो निकले, हम तो गरीब आदमी है साहब


हम पर बुरी नजर मत डालो....................


तब तक एक पांचवे सज्जन आये


उन्होंने कहा जय भीम , मैंने कहा समझ गया आपकी थीम


आपका चुनाव निशाँ जरूर हाथी Hoga


उन्होंने कहा भाईसाहब आप तो काफी समझदार है


मैंने कहा हम तो आपके सगे पत्तीदार है


हाथी हमारा जीवन साथी है ,


Akal se khota , Shareer Se bhaari hai ,


Jaise Rahul gandhi ko jhelna mayavati ki lchaari hai ........